Tulshi manas bharti
तुलसी मानस भारती
तुलसी मानस प्रतिष्ठान म.प्र. की मुख पत्रिका तुलसी मानस भारती का प्रारंभ रामचरित मानस चतुशताब्दी के ‘मानस समाचार’ के रूप में प्रकाश में आया था, जिसे चतुशताब्दी समारोह के बाद साहित्यिक रूप देकर ‘मानस भारती’ कर दिया गया। उन्नीस वर्षों के बाद यह पत्रिका भारत सरकार के समाचार पत्रों के रजिस्ट्रार नई दिल्ली के आग्रह पर ‘तुलसी मानस भारती’ के नाम से गत् 37 वर्षों से निरन्तर प्रकाशित हो रही है।
तुलसी मानस भारती पत्रिका के संबंध में पूज्यपाद पं. रामकिंकर महाराज ने कहा इस पत्रिका से मैं प्रारंभ से ही जुड़ा हूं। मैंने अनुभव किया कि पत्रिका का मुख्य उद्देश्य राष्ट्र की चिति को जाग्रत करना है।
अभी तक इसके प्रमुख संपादक निम्नलिखित महानुभाव रहें हैं -
- श्री गोरेलाल शुक्ल
- डॉ. प्रभुदयाल अग्निहोत्री
- श्री अम्बाप्रसाद श्रीवास्तव
- श्री एन.एल. खंडेलवाल
वर्तमान में तुलसी मानस भारती के प्रधान संपादक श्री प्रभुदयाल मिश्र तथा संपादक के रूप में श्री देवेंद्र कुमार रावत यह उत्तरदायित्व का निर्वहन कर रहे हैं |
पत्रिका में आध्यात्मिक पुनरुत्थान एवं सांस्कृतिक गरिमा के उन्नयन का स्वर तो होता ही है, रामकथा को विश्व व्यापकता और प्रभावकारिता को प्रभु विष्णुता के साथ रेखांकित भी किया जाता है। इस प्रकार आज यह पत्रिका श्रेष्ठ पत्रिकाओं की एक कड़ी मानी जाती है।
मानस भारती के विविध अंको में इस भाव, को लेकर जो सामग्री प्रतिमाह उपलब्ध कराई जा रही है, वह सामग्री व्यावसायिक पत्रिकाएं लाखों पाठकों तक पहुंचकर भी नही कर सकती। चरित्र निर्माण को लेकर मानस में सत् पक्ष को ग्रहण तथा असत् पक्ष की उपेक्षा का भाव यदि हम ग्रहण कर सकें तो पाठकों को अनुभव होगा कि मानस-भारती में प्रकाशित हर रचना की एक-एक पंक्ति और पंक्ति का प्रत्येक शब्द पठनीय तथा मननीय है।



