तुलसी मानस प्रतिष्ठान के भव्य परिसर में स्थापित श्री सिद्ध रघुनाथ मंदिर की स्थापना 24 दिसंबर 2014, को भानपुरापीठ के शंकराचार्य अनंत श्री विभूषित श्री दिव्यानंदजी तीर्थ के करकमलों से हुई थी। इस मंदिर की स्थापना की प्रेरक भूमिका में श्रद्धालुओं के साथ-साथ पूर्व से स्थापित मढ़िया की वह मूर्ति भी है जिसमें भक्तराज केवल श्रीराम, जानकी एवं श्री लक्ष्मण को गंगापार करते हुए दिखाया गया है।


तुलसी मानस प्रतिष्ठान के परिसर में स्थित मढ़िया में केवट न जाने कब से प्रतीक्षारत था। संयोगवश प्रभु की इच्छा से ही कार्याध्यक्ष श्री रमाकांत दुबे के आमंत्रण पर परमपूज्य प्रातः स्मरणीय स्वामी सत्यमित्रानंदजी गिरि मानस भवन पधारे और तुलसी मानस प्रतिष्ठान के दक्षिण में स्थित प्राचीन मढ़िया के दर्शन किये। मढ़िया में लगभग 500 वर्ष पुरानी मूर्ति को देखकर स्वामीजी ने श्री रमाकांत दुबे से कहा कि देखो “ये कितना होशियार केवट है जो भवसागर तारने वाले भगवान राम, जगत जननी सीता और जगत के आधार श्री लक्ष्मण को सुरसरि (गंगा) पार करा रहा है। क्यों न इस स्थान पर एक भव्य मंदिर बने।


प्रभु इच्छा और स्वामी सत्यमित्रानंदजी के आशीर्वाद से 24 दिसंबर 2014 को श्रीसिद्ध रघुनाथ मंदिर में श्री राम दरबार की प्राण प्रतिष्ठा से शुभ संकल्प की पूर्ति हो गयी।