पुस्तकालय
तुलसी मानस प्रतिष्ठान राजधानी की एक प्रतिष्ठित सांस्कृतिक, धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सामाजिक संस्था है। इसकी लोकप्रिय गतिविधियाँ वर्ष भर सक्रियता के साथ निरंतर चलती रहती है। तुलसी मानस प्रतिष्ठान लंबे समय से अपने पुस्तकालय को जनसाधारण के लिए उपयोगी एवं महत्वपूर्ण अध्ययन केन्द्र बनाने के लिये प्रयासरत है। इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए तुलसी मानस प्रतिष्ठान ने पंडित रामकिंकर उपाध्याय पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र जैसी संस्था को पंजीकृत कराने का विचार किया जिससे पुस्तकालय समृद्ध एवं सर्वव्यापी तथा जनोपयोगी हो सके। अंततः मध्यप्रदेश शासन के संस्थाओं को पंजीकृत करने वाले विभाग ने 22 अगस्त 2021 को इस पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र को पंजीकृत कर दिया।
संस्था ने अपने व्यापक उद्धेश्यों की पूर्ति के लिए प्रयास प्रारंभ किये। पंजीयन के पूर्व पुस्तकों को रखने के लिये 14 अलमारियाँ थीं और लगभग 6500 पुस्तकें विद्यमान थीं। इतनी सीमित पुस्तकें शोध केन्द्र के लिये अनुकूल नहीं थीं। अतः प्रतिष्ठान ने पुस्तकें बढ़ाने का उपक्रम प्रारंभ किया। 5 वर्षों के सतत प्रयास से आज पंडित रामकिंकर उपाध्याय पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के पास लगभग 120 अलमारियाँ एवं लगभग 17000 पुस्तकें उपलब्ध हैं। पुस्तकों की संख्या बढ़ाने का प्रयत्न अनवरत जारी है। एक नई संस्था निर्मित होने के पश्चात् यह संस्था आत्मनिर्भर बने, यह सबका संकल्प है जिसे साकार करने के लिए सभी के सहयोग की अपेक्षा है।
पुस्तकालय में अधिकतम साहित्य सामग्री उपलब्ध हो। जिससे जिज्ञासु एवं शोधकर्ता लाभ प्राप्त कर सकें। ‘‘संसार का सारा ज्ञान पुस्तकों में भरा पड़ा है’’ यह उद्घोष लोकोपयोगी एवं साकार रूप ग्रहण करे, यह हम सभी सदस्यों की भावना है। यह ज्ञान की कार्यशाला और अध्ययन का शान्त तथा सुविधा सम्पन्न केन्द्र के रुप से प्रतिष्ठित हो। अतः इस पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र का विस्तार हम सब लोगों के सार्थक एवं सकारात्मक प्रयास पर ही निर्भर है। शोधकर्ता एवं जिज्ञासु अपने ज्ञान की पिपासा को इस पुस्तकालय के माध्यम से शान्त कर सकें, तृप्त हो सकें और आत्मसंतोष प्राप्त कर सकें इसी उद्धेश्य से पुस्तकालय के लिए उपयुक्त मानव संसाधनों की भी व्यवस्था की जा रही है जिससे यह संस्थान आत्मनिर्भर होकर शैक्षणिक प्रतिष्ठा प्राप्त संस्थान बन सके।



